ढल रही है रात………….

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ढल रही है रात  धीरे-धीरे ,
सपने रहे है उड़ मेरे आस पास
जैसे हो मेरे भावनाओं की परछाईया

रात और दिल के बीच है
मेरे अपने भ्रम की दीवार
पता है इससे के ढल रही है रात
फिर भी दिल कहता है
रुक जाये रात की ये
गहरी और सुनसान पलें
रात  की इन बेदर्द  पलों में
रोना चाहता हू मैं
पर अब नहीं है आसूं इन आखों में

रात के अकेलेपन का है
एहसास मुझे पर अब
दिल को मेरे देती है सुकून
ये अकेलापन जो है बिखरी
चारो ओर मेरे

मुझे क्या था पता के
आने वाली है एक तूफानी सुबह
इस  खामोश से रात के बाद
रात की खामोसी में मैंने
सुनी बारिश के टिप टीपने को
लगा जैसे रो रहा है वों आसमां

अँधेरे के गहराई में पल पल
टूट रहे थे सपने मेरे
लगा जैसे दूर कहीं
कोई हो ले रहा नाम मेरा

रात ने किये उजागर मेरे
कमज़ोर नग्न आत्मा के
खोखलेपन को
जिसने दिखाई मेरे काल्पनिकता को,

खुद को काल्पनिक अर्थो में छिपाने के लिए
में गया था सब कुछ भूल
आज फिर लगा मुझे एक खालीपन मेरे आस पास
जैसे मेरे स्मृति की गहेरी गलिओं में उठा हो
एक दर्द ,

रात के ढलने में और
मेरे टूटने में जैसे रहा न कोई फर्क
ढल रही रात , मेरे हर एक आँसू के साथ

रौशन

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हर एक पल कि…

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Devil:- क्यूँ..जिंदगी  में कभी कभी ऐसे मुकाम आते है…
जहाँ सबके होते हुए भी….एक खालीपन का रहता है एहसास …..
क्यूँ…लगती है  राहें  सुनी सुनी…..
क्यूँ लगती है जिंदगी एक बीरान ..
क्यूँ लगता है के परछाईयाँ भी नहीं है साथ मेरे,
आखिर  क्यूँ ?

Angle:- अपनी नज़रो को बदल के देखो
खालीपन  का नामो   निशान  न होगा…..
रास्ते  होंगी मुस्किल  पर
हर अच्छे  दोस्त का साथ होगा.

Devli:- कितनी दूर  निभाओगे  साथ आप…..
हर पल देखा है अपनों   को बिछड़ते इन राहों  में….
हर पल की है यही सचाई ….
क्या करें एक पल की है ये दुनिया…
हर एक पल कि है यही कहानी

Roushan n Richa

वो हमसे रूठे ….

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वो हमसे रूठे
थी गलती हमारी
या थी अदा उनकी

हमने तो चाहा था साथ उनका
पर वो छोड़ गये दे दिलासा

हमने तो फैलाई थी अपनी बाहें
पर आया उन्हें रास साथ किसी और का

अपनी तो किस्मत ही थी खोटी
जो मिली टूटी कश्ती

कौन करता है बात मझधार पार करने की
साहिल के नरम थपेरों से डूबी आपनी कश्ती

किस्मत तो थी अपनी खोटी
जो खोया उन्हें हमने पाने से पहले

अब हमारी हसरत है अजीब
हम खोजते है कोई उनके जैसी नाजनीन

रौशन