रंग प्यार का….

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रंग हो होली का या प्यार का
थोडा खुमार तो चढ़ता है

ऐसे में याद आना उनका
इतना हक तो बनता है

कहते है लोग के प्यार के रंगों से
रहे रंगीन आपकी जिंदगी

फिर जिंदगी में बेरंग सा
वक्त क्यों बनता है

आते हो तुम कुछ पल के लिए
तुम्हे रोकने का हक तो मेरा बनता है

तुम कहो या न कहो
तुम्हारे पास आना तो मेरा बनता है

काश तुम समझती मेरी ख़ामोशी को
फिर भी मेरा खामोश रहना तो बनता है

रौशन

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आंशु के मोती

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जिंदगी है कहीं अब छुटी पीछे
उन आशुओं के साथ जो,
तुम छोड़ गए थे अपने जाने के बाद
अब तो हर तरफ बस हमें आते है नज़र,
वही पुराने टूटे सपनो के बिखरे मोती
जैसे वो हो कह रहे के,
लौट आयेंगे वो जो गए थे पहले
दे तेरे पलकों पे आंशु के मोती………
रौशन

फिर से है जेहन में एक सवाल ….

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बुझती  हुई  लौ  में
रूकती  हुई  साँसों  में
आपके  हर  ग़मों  के
आहों  में  मैं  नहीं

मैं  तो  हु  आपके
हर  अच्छे पलों  का  साथी
नहीं  में  आपके  ग़मों  का  साथी
क्यूँ ? ये  मैं  भी  न  समझ  पाया  अब  तक

अब  ये  हो  मानव  मन  की  चंचलता
जो  देख  ख़ुशी  मुड़  जाता  है ..
ग़मों  को  दिखा  के  अपनी  पीठ
क्या  है  सही  और  क्या  है  गलत
रख के उसको ताक पे

कब  समझा  है  ये  इंसान के
मन  है  सबसे  बड़ा  दुश्मन
आपका …क्यूँ ?
कभी  ये  खुद  से  पूछ  के  देखो
जिंदगी  की  ख़ुशी  में  है  पल  भर  की  ख़ुशी
पर  दुसरे  के  ग़मों  में  दे  के  साथ
जो  है  मिलती  ख़ुशी  वो  किसी   वरदान  से  कम  नहीं

रौशन

मोहब्बत का असर

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kitu:-

ना वो आसमा,
ना वो मोती,
ना वो जुगनू है ए-रहगुज़र
ये बस है मोहब्बत का असर ,

Roushan:-

मोहब्बत का असर कहो या
कहो इससे मेरा दीवानापन
या कहो मेरी दीवानगी की हद ..
पर जैसे मैंने देखा उसे शायद
देखा हो किस्सी और ने उसे वैसा…

Roushan n Kitu

हर एक पल कि…

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Devil:- क्यूँ..जिंदगी  में कभी कभी ऐसे मुकाम आते है…
जहाँ सबके होते हुए भी….एक खालीपन का रहता है एहसास …..
क्यूँ…लगती है  राहें  सुनी सुनी…..
क्यूँ लगती है जिंदगी एक बीरान ..
क्यूँ लगता है के परछाईयाँ भी नहीं है साथ मेरे,
आखिर  क्यूँ ?

Angle:- अपनी नज़रो को बदल के देखो
खालीपन  का नामो   निशान  न होगा…..
रास्ते  होंगी मुस्किल  पर
हर अच्छे  दोस्त का साथ होगा.

Devli:- कितनी दूर  निभाओगे  साथ आप…..
हर पल देखा है अपनों   को बिछड़ते इन राहों  में….
हर पल की है यही सचाई ….
क्या करें एक पल की है ये दुनिया…
हर एक पल कि है यही कहानी

Roushan n Richa

एक सवाल ..खुद से या फिर आपसे

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आज भी इंसान
इंसान से नहीं करते दोस्ती

दोस्ती के लिए भी वो देखते है
धर्म और जाति इंसान की

आखिर दोस्ती क्या है?
मैंने जहाँ तक है जाना इसे,

दोस्ती है दिलों का रिश्ता
फिर इस दिल की जाति है क्या?

आखिर है इस दिल का धर्म क्या
हर वक्त ये सवाल है मेरे जेहन में

आज भी बचे लेते है जन्म
बिना धर्म और जाति देख के

फिर हम कौन है होते
उन्हें धर्म और जाति पे लड़ाने वाले

मेरा तो है एक सपना
हो एक ऐसा जहान अपना
जहाँ इंसानियत हो जाति सबकी
और मानवता को धर्म सबका
रौशन