दोस्ती…

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दोस्ती है क्या
ये जाना दोस्तों से
दूर आने के बाद

कभी सोचा नहीं था मैंने
के मेरी जिंदगी होगी
इतनी उदास

अब जाके जाना मैंने
के क्यूँ वो कहते है
के रौशन तू रह नहीं सकता
अकेले तन्हा

काश ऐसी न होती जिंदगी के
मुझे आना पड़ता दूर अपनों से

रौशन

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उस चाँद की चांदनी तले

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अहसास तो होता है,
तेरे होने का पर दरमियाँ
नहीं होती खत्म ,
चाँद की क्या करू में बात
जाके  पूछ ले कोई चकोर से
जिससे है अहसास चांदनी का
पर दरमियाँ है की कम न होती ,
हर वक्त पल पल मर रही है
जैसे जिंदगी ,
उस चाँद की चांदनी तले

रौशन

आंशु के मोती

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जिंदगी है कहीं अब छुटी पीछे
उन आशुओं के साथ जो,
तुम छोड़ गए थे अपने जाने के बाद
अब तो हर तरफ बस हमें आते है नज़र,
वही पुराने टूटे सपनो के बिखरे मोती
जैसे वो हो कह रहे के,
लौट आयेंगे वो जो गए थे पहले
दे तेरे पलकों पे आंशु के मोती………
रौशन

जिन्दगी मुझे किस मुकाम

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जिंदगी  ये  मुझे  किस  मुकाम  पे  ले  आई
जहाँ  हर  तरफ  है  अँधेरा  और  तन्हाई

जिसकी  तरफ  है  बढाया  हमने  हाथ
उसी  ने  दिया  है  धका दो  कदम  के  बाद

जिंदगी  की  बेरहम  थापेरो  ने
तोड़ी  है  मेरी  हिम्मत  सारी

कल  थे  हम  घिरे  अपने चाहने  वालों  से
आज  है  मेरी  गलियां  बिरान

कल तक लगती थी जिन्हें मेरी बातें आच्छी
आज वही कहते है मत दे तू भाषण मुझे

कोई तो बता दो देने से पहले गलियां
के गलती क्या है मेरी..

रौशन

फिर से है जेहन में एक सवाल ….

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बुझती  हुई  लौ  में
रूकती  हुई  साँसों  में
आपके  हर  ग़मों  के
आहों  में  मैं  नहीं

मैं  तो  हु  आपके
हर  अच्छे पलों  का  साथी
नहीं  में  आपके  ग़मों  का  साथी
क्यूँ ? ये  मैं  भी  न  समझ  पाया  अब  तक

अब  ये  हो  मानव  मन  की  चंचलता
जो  देख  ख़ुशी  मुड़  जाता  है ..
ग़मों  को  दिखा  के  अपनी  पीठ
क्या  है  सही  और  क्या  है  गलत
रख के उसको ताक पे

कब  समझा  है  ये  इंसान के
मन  है  सबसे  बड़ा  दुश्मन
आपका …क्यूँ ?
कभी  ये  खुद  से  पूछ  के  देखो
जिंदगी  की  ख़ुशी  में  है  पल  भर  की  ख़ुशी
पर  दुसरे  के  ग़मों  में  दे  के  साथ
जो  है  मिलती  ख़ुशी  वो  किसी   वरदान  से  कम  नहीं

रौशन

मोहब्बत का असर

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kitu:-

ना वो आसमा,
ना वो मोती,
ना वो जुगनू है ए-रहगुज़र
ये बस है मोहब्बत का असर ,

Roushan:-

मोहब्बत का असर कहो या
कहो इससे मेरा दीवानापन
या कहो मेरी दीवानगी की हद ..
पर जैसे मैंने देखा उसे शायद
देखा हो किस्सी और ने उसे वैसा…

Roushan n Kitu

याद !!

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याद  करने  से  आया  कुछ  याद  मुझे ,
के  कुछ  रखना  है  याद  मुझे  और
कुछ  है  जाना  भूल , पर  क्या  रखना  है
याद  और  क्या  जाना  है  भूल  ये  याद  नहीं  मुझे

याद  है  मुझे  कुछ  अच्छे और  कुछ  बुरे  पल ,
किस्से  जाऊँ में  भूल , दोनों  है अनमोल  मेरे  लिए ,
क्या  भूल  जाऊँ उन  अच्छे  पलों  को  जो याद  दिलाते  है ,
मेरे  बीते  कल  के  सुनहरे  लम्हे ,

या  भूल  जाओं  में  बीते  कल  के  बुरे  यादों  को ,
जो  मुझे  दिलाते  है  एहसास  के  में  न  करूँ
वो  गलतियाँ  आने  वाले  कल  में ,
मैं हूँ  बड़े  कशमकश में किस्से  जाओं
भूल  आपने  कल  को  या  आपने  आज  को

Roushan