हर एक पल कि…

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Devil:- क्यूँ..जिंदगी  में कभी कभी ऐसे मुकाम आते है…
जहाँ सबके होते हुए भी….एक खालीपन का रहता है एहसास …..
क्यूँ…लगती है  राहें  सुनी सुनी…..
क्यूँ लगती है जिंदगी एक बीरान ..
क्यूँ लगता है के परछाईयाँ भी नहीं है साथ मेरे,
आखिर  क्यूँ ?

Angle:- अपनी नज़रो को बदल के देखो
खालीपन  का नामो   निशान  न होगा…..
रास्ते  होंगी मुस्किल  पर
हर अच्छे  दोस्त का साथ होगा.

Devli:- कितनी दूर  निभाओगे  साथ आप…..
हर पल देखा है अपनों   को बिछड़ते इन राहों  में….
हर पल की है यही सचाई ….
क्या करें एक पल की है ये दुनिया…
हर एक पल कि है यही कहानी

Roushan n Richa

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एक सवाल ..खुद से या फिर आपसे

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आज भी इंसान
इंसान से नहीं करते दोस्ती

दोस्ती के लिए भी वो देखते है
धर्म और जाति इंसान की

आखिर दोस्ती क्या है?
मैंने जहाँ तक है जाना इसे,

दोस्ती है दिलों का रिश्ता
फिर इस दिल की जाति है क्या?

आखिर है इस दिल का धर्म क्या
हर वक्त ये सवाल है मेरे जेहन में

आज भी बचे लेते है जन्म
बिना धर्म और जाति देख के

फिर हम कौन है होते
उन्हें धर्म और जाति पे लड़ाने वाले

मेरा तो है एक सपना
हो एक ऐसा जहान अपना
जहाँ इंसानियत हो जाति सबकी
और मानवता को धर्म सबका
रौशन