रंग प्यार का….

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रंग हो होली का या प्यार का
थोडा खुमार तो चढ़ता है

ऐसे में याद आना उनका
इतना हक तो बनता है

कहते है लोग के प्यार के रंगों से
रहे रंगीन आपकी जिंदगी

फिर जिंदगी में बेरंग सा
वक्त क्यों बनता है

आते हो तुम कुछ पल के लिए
तुम्हे रोकने का हक तो मेरा बनता है

तुम कहो या न कहो
तुम्हारे पास आना तो मेरा बनता है

काश तुम समझती मेरी ख़ामोशी को
फिर भी मेरा खामोश रहना तो बनता है

रौशन

3 thoughts on “रंग प्यार का….

  1. शानदार पंक्तियाँ..होली का बेहद ही खूबसूरती से चित्रण किया है, बहुत बहुत शुभकामनाएं…

  2. दूर रह कर दोस्तों को सताकर कभी रूठकर कभी मनाकर
    बीते पलों को याद दिलाना इतना तो हक बनता है
    होली का रंग तो बहाना है अपने को दुनिया के रंग में
    नाच गा कर डुबोना इतना तो हर किसी का बनता है …..

    खामोसी तो रंग का हिस्सा है हर रंग में रंगना
    इतना तो अपना भी बनता है ………..

  3. दूर रह कर दोस्तों को सताकर कभी रूठकर कभी मनाकर
    बीते पलों को याद दिलाना इतना तो हक बनता है
    होली का रंग तो बहाना है अपने को दुनिया के रंग में रंगने का
    नाच गा कर डुबोना इतना तो हर किसी का बनता है …..

    खामोसी तो रंग का हिस्सा है हर रंग में रंगना
    इतना तो अपना भी बनता है ………..

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