इस चाँद की चांदनी तले!!

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अपने झरोखे से देखा मैंने ,
चाँद छुपा हुआ पीपल तले
जाने क्यूँ उठी एक कसक मन में के काश,
होते तुम भी अभी यहाँ साथ मेरे
देख उस आधे चाँद को
मैंने कहा खुद से,
आज भले है जिंदगी
मेरी आधी अधूरी बिन तेरे,
कभी तो आएगी पूर्णिमा की चांदिनी
मैं तो तेरे इन्तेज़ार में ,
आज भी हूँ बैठा इस किनारे
ठीक उस चकोर की तरह ,
जो बैठ उस पीपल के ताने पे
देख रहा है उस चंद को,
उसकी चांदनी तले
जाने कब होगी ये दूरियां खत्म ,
कहीं उन्ही न बीत जाये जिंदगी मेरी
तेरे आने के इन्तेज़ार में,
माना मैंने कहाँ नहीं तुझसे
तेरे जाने से पहले,
पर अब रह नहीं सकता
एक पल बिना तेरे,
काश मैंने रोक लिए
होते तेरे कदम जाने से पहले ,
तो न होता मैं आज
बेवस और लाचार ,
इस चाँद की चांदनी तले

 

रौशन

4 thoughts on “इस चाँद की चांदनी तले!!

  1. आनन्‍द

    ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
    हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

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    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
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    धन्‍यवाद

  2. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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