प्यार भरे एहसास …..

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Girl:-

ढूँढता फिरता है जिन राहों मे मुसाफिरों की तरह
उन्ही पगडन्डियों मे बिखर गई हूँ रौशनी बनकर — —
देख सक़ता है तो .. देखले मुझको …..!!
Boy:-

आज हम गुज़रे उन्ही रहो से
जहाँ पे आप है बिखेर हुए रौशनी बनके
वो ज़मीन लगती है, आसमा की तरह
जैसे रात ने ओढ़ रखी हो
चादर लाखों सितारों वाली,

फिर मुझे लगा के जैसे
बिखरे हो लाखो मोती
सागर के ह्रदय तले
जिन्हें पाना क्या, छूना है मुश्किल

फिर  मुझे  लगा  जैसे  हो
लाखों  जुगनू
खलेते हुए
फूलों  पे

अब  आप  ही  बताओ ..
के  क्या  कहें  इसे ..

Roushan(रौशन)

2 thoughts on “प्यार भरे एहसास …..

  1. Amardeep

    “ye wo uljha hua sach hai jisme sabhi log fasna chahte hai magar fasne ke baad uljhan main is kadar ulajh jaten hai ki unhe ye tak pata nahi chalta ki wo uljhan main fase hue hain………..

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