अगर प्यार !

Standard

अगर प्यार है अकेले छोरने के लिए
मैं खुद को क्यूँ इससे बंधा पता हूँ ?

अगर प्यार है खिली हुई धूप
तो मुझे के नज़ारे क्यों है मिलते ?

अगर प्यार दुनिया को है नचाती,
तो में खुद को रुका हुआ क्यों हूँ पाता?

अगर प्यार है आज के खुशी,
तो में क्यूँ आने वाले पल को देखता हूँ ?

अगर प्यार है सबसे बड़ी खुशी,
तो मुझे क्यों गम मिले ?

रौशन

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s