बुझती हुई लौ में
रूकती हुई साँसों में
आपके हर ग़मों के
आहों में मैं नहीं
मैं तो हु आपके
हर अच्छे पलों का साथी
नहीं में आपके ग़मों का साथी
क्यूँ ? ये मैं भी न समझ पाया अब तक
अब ये हो मानव मन की चंचलता
जो देख ख़ुशी मुड़ जाता है ..
ग़मों को दिखा के अपनी पीठ
क्या है सही और क्या [...]
Posts Tagged ‘khub’
27 Sep
फिर से है जेहन में एक सवाल ….
3 Jun
हर एक पल कि…
Devil:- क्यूँ..जिंदगी में कभी कभी ऐसे मुकाम आते है…
जहाँ सबके होते हुए भी….एक खालीपन का रहता है एहसास …..
क्यूँ…लगती है राहें सुनी सुनी…..
क्यूँ लगती है जिंदगी एक बीरान ..
क्यूँ लगता है के परछाईयाँ भी नहीं है साथ मेरे,
आखिर क्यूँ ?
Angle:- अपनी नज़रो को बदल के देखो
खालीपन का नामो निशान न होगा…..
रास्ते होंगी मुस्किल पर
हर अच्छे [...]
20 Nov
किसी ने क्या खूब कहा
किसी ने क्या खूब कहा मुझपे,
दिल्लगी दीवार से तो परी क्या चीज़ है
कभी हमारे मन को टटोल के भी तो देखो
दिल्लगी दीवार से है परी से क्यूँ नही ये पूछ के तो देखो
हमने खोया बहुत इस जिंदगी में
कुछ तो अपने साथ रहने दो
परी तो परी है आज नही कल उड़ जानी है
दीवार का है क्या [...]
comments