बुझती हुई लौ में
रूकती हुई साँसों में
आपके हर ग़मों के
आहों में मैं नहीं
मैं तो हु आपके
हर अच्छे पलों का साथी
नहीं में आपके ग़मों का साथी
क्यूँ ? ये मैं भी न समझ पाया अब तक
अब ये हो मानव मन की चंचलता
जो देख ख़ुशी मुड़ जाता है ..
ग़मों को दिखा के अपनी पीठ
क्या है सही और क्या [...]
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27 Sep
फिर से है जेहन में एक सवाल ….
3 Jun
हर एक पल कि…
Devil:- क्यूँ..जिंदगी में कभी कभी ऐसे मुकाम आते है…
जहाँ सबके होते हुए भी….एक खालीपन का रहता है एहसास …..
क्यूँ…लगती है राहें सुनी सुनी…..
क्यूँ लगती है जिंदगी एक बीरान ..
क्यूँ लगता है के परछाईयाँ भी नहीं है साथ मेरे,
आखिर क्यूँ ?
Angle:- अपनी नज़रो को बदल के देखो
खालीपन का नामो निशान न होगा…..
रास्ते होंगी मुस्किल पर
हर अच्छे [...]
10 May
Ek sawal..khud se ya phir aapse…
aaj bhi insaan
insaan se nahi karte dosti
dosti ke liye bhi woh dekhte hai
dharam aur jaati insaan ki
aakhir dosti kya hai?
mein jahan tak suna hai
dosti hai dilon ka rishta
phir is dil ki jaati hai kya?
aakhir hai is dil ka dharam kya
har waqt ye sawal hai mere jehan mein
aaj bhi bache lete hai janam
bina dharam aur jaati [...]
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