बुझती हुई लौ में
रूकती हुई साँसों में
आपके हर ग़मों के
आहों में मैं नहीं
मैं तो हु आपके
हर अच्छे पलों का साथी
नहीं में आपके ग़मों का साथी
क्यूँ ? ये मैं भी न समझ पाया अब तक
अब ये हो मानव मन की चंचलता
जो देख ख़ुशी मुड़ जाता है ..
ग़मों को दिखा के अपनी पीठ
क्या है सही और क्या [...]
Archive for September, 2009
27 Sep
comments