Archive for December, 2008

एक इल्तेज़ा

हमें  तो  है मोहबत  आपसे
हम ये कह  न सके  आपसे
जब से टकराई  है नज़रें  आपसे
हम भूल गए सब कुछ
कभी हमें भी देखो प्यार  से
आपकी ये बेरुखी अब है तडपाती  हमें
हमने तो की है मोह्बात  आपसे
कोई गुनाह  तो नहीं किया
रोज़ गुज़रते  हैं आपकी गलीओं  से
इसी खावाशी  में के
कभी तो आप हमें मिल जाओ  उसी मोड़ पे
जहाँ [...]

Continue reading »

एक छोटी सी इल्तज़ा…

है आपसे हमारी एक छोटी से इल्तज़ा
यूँही रहना आप साथ मेरे
जब से मिला हूँ आपसे
बस आप ही आप हो हरसू
अब हकीकत और सपने
हैं आप हमारे
जब भी सोचता हूँ
आप ही आते हो नज़र हमें
सोते जागते करते है
हम याद आपको
हर रात देखते है
सपने आपके
रौशन

Continue reading »

In search …

Continue reading »